Untold Secret of Bhagvat Geeta भागवत गीता की अनसुलझे रहश्य


हॉलीवुड फिल्म स्पाइडर मैन एक्रॉस स्पाइडर वर्ल्ड्स डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टी वर्ड्स ऑफ मैडनेस जैसी कई मूवीज आई और उन्होंने ऑडियंस के बीच में एक अलग ही सस्पेंस छोड़ दिया कि इस दुनिया की तरह ही कई और भी दुनिया है जहां पर हम ही हैं। इसी को मल्टी वर्ड्स कहते हैं। लेकिन अगर हम कहें कि यह फैक्ट केवल फिल्मों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा रियालिटी में भी होता है। जी हां, एकदम सही सुना आपने।

ऐसा हम कोई कहीं सुनी बात नहीं। या फिर फिल्मों की दुनिया से आइडिया चुराकर नहीं कह रहे। बल्कि हॉलीवुड ने खुद ये आइडिया हमारे शास्त्रों से चुराए हैं और हम ही को दिखा रहे हैं जिससे वह करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और हमारे आपके जैसे लोग इसे इनके दिमाग की क्रिएटिविटी समझने लगे। हम बात कर रहे हैं भगवत गीता की। भगवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो साइंटिस्ट के लिए भी एक मिस्ट्री बना हुआ है। जिसे आप जितनी बार भी देखेंगे, पढ़ेंगे उतने ही बार सरप्राइज हो जाएंगे।

असल में माना जाता है कि अर्जुन आज भी कुरुक्षेत्र की भूमि पर खड़े भगवद गीता सुन रहे हैं। वैसे तो महाभारत का युद्ध हजारों साल पहले द्वापर युग के अंत में खत्म हो चुका है, पर अगर आपसे यह कहा जाए कि महाभारत का युद्ध आज भी चल रहा है तो । जब फिजिसिस्ट ह्यूज एवरेट ने पहली बार ऑल्टरनेट रियाल्टी और मल्टी वर्ड्स की बात की, तभी से साइंस की दुनिया में मल्टी वर्ड्स की थ्योरी को बढ़ावा मिलने लगा।

Untold Secret of Bhagvat Geeta भागवत गीता की अनसुलझे रहश्य

लेकिन इससे हजारों साल पहले ही भगवद गीता के कुछ अध्याय में इस पर बातें हो चुकी हैं। यह पूरा संसार और इसमें बसने वाले सारे ब्रह्मांड मेरे अस्तित्व का एक छोटा सा हिस्सा है। यह बात कहीं और नहीं, बल्कि गीता के 10वें अध्याय में कहे गए इस श्लोक से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे यूनिवर्स के अलावा भी ऐसे कई यूनिवर्स हैं जो श्री कृष्ण का हिस्सा हैं। भगवद गीता के ग्याहरवें अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि सारा ब्रह्मांड उन्हीं से बना है। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना विश्वरूप दिखाया।

उनके इस विश्वरूप के कई सारे सर थे, कई भुजाएं थी और उनके हाथों में अलग अलग अस्त्र थे। कई रंगों और आकारों से बना उनका विश्वरूप अर्जुन को हर दिशा में नजर आने लगा और उन्हें श्रीकृष्ण के शरीर के अंदर हमारे यूनिवर्स जैसी कई सारी यूनिवर्स दिखने लगी। और तभी अर्जुन को रियलाइज हुआ कि जिस श्रीकृष्ण को वह अपना मित्र मानते हैं, वह तो असल में सारे ब्रह्मांड के कर्ता धर्ता है। पर अगर सारी यूनिवर्स श्रीकृष्ण से बनी है तो सब अलग अलग समय में क्यों चल रहा है? भगवद गीता के आठवें अध्याय की माने तो हमारा यूनिवर्स टाइम साइकल ब्रह्मा जी के हिसाब से चलता है।

भागवत पुराण में यह कहा गया है कि हर यूनिवर्स में एक अलग ब्रह्मलोक है और वहां एक अलग ब्रह्मा जी हैं जो अपने यूनिवर्स टाइम साइकल को मेंटेन करते हैं। और सबसे खास बात तो यह है कि यह सभी टाइम साइकल्स एक दूसरे से बहुत अलग हैं। अब थोड़ा आगे बढ़ते हैं और अगले गीता के रहस्यों के बारे में जानते हैं। 1930 एक चार साल की बच्ची शांति देवी अचानक से अपने परिवार वालों से कुछ अजीब सी बातें करने लगी। वह बस एक ही लाइन बार बार रिपीट कर दी। मैं पहले भी यहां रह चुकी हूं।

जब इस बात की जड़ तक उसके परिवार वाले गए तो यह पता चला कि वह उन्हें अपने पिछले जन्म के बारे में बता रही थी। उसको सब कुछ पता था कि वह कहां रहती है। उसका पति कौन था और यहां तक कि उसको अपनी मौत का भी सच पता था। आज के दौर में भी इस किस्से को पुनर्जन्म का एक दिलचस्प केस माना गया है। पुनर्जन्म एक ऐसा टॉपिक जिसे सुनकर एक बार फिर से फिल्मों का जिक्र मन में आता है। फिर चाहे वह करण अर्जुन हो या फिर ओम शांति हो। लेकिन यह सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं है। यह नहीं मिथ है और न ही कोई मिस्ट्री। यह एक जीता जागता सच जिसके बारे में भगवत गीता में बताया गया है।

उसमें इस पुनर्जन्म के कॉन्सेप्ट को काफी डीटेल में एक्सप्लेन किया गया है। भगवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह समझाया है कि हमारा शरीर डिस्ट्रॉय हो सकता है, पर हमारी आत्मा हमेशा अमर रहती है। गीता के आठवें अध्याय के छठे श्लोक के अनुसार जो बातें इंसान को उसकी मृत्यु के वक्त याद होती हैं, वह उसकी आत्मा का एक हिस्सा बन जाती है और वही बातें वह दूसरे शरीर में जाने के बाद भी याद रहती हैं।

इन्हें पॉप्युलर लीग पास लाइफ मेमरी कहते हैं, जिनकी सोच पर आज भी डिबेट होती है। भगवद गीता कहती है कि मृत्यु और पुनर्जन्म एक ऐसी नेवर एंडिंग साइकल है, जिससे आत्मा बार बार गुजरती है। अब अगर हम तीसरे रहस्य या फैक्ट के बारे में बात करें तो आपने सुना होगा कि जहां कृष्ण होते हैं वहां राधा रानी का नाम जरूर आता है और जहां राधा होती है वहां श्री कृष्ण जरूर होते हैं लेकिन श्री कृष्ण की कही भगवद गीता में सबकुछ है तो फिर उनकी राधा का नाम क्यों नहीं?

Untold Secret of Bhagvat Geeta भागवत गीता की अनसुलझे रहश्य

आपने कभी सोचा है दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे माने जाते हैं। फिर कृष्ण ने राधा का जिक्र क्यों नहीं किया? गीता में एक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद एक बार अर्जुन श्री कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। वहां के द्वारपालों ने अर्जुन को बताया द्वारकाधीश अभी छत पर हैं। आप यहां मेहमान कक्ष में बैठे। हम अभी उनके पास संदेशा भेज देते हैं कि तभी। अर्जुन ने सिपाही को रोका और उससे कहा, आप माधव को संदेश न भेजिए, मैं खुद ही जाकर उनसे मिल लेता हूं। इतना कहकर अर्जुन श्रीकृष्ण से मिलने छत पर चले गए। जैसे ही वह छत पर पहुंचे, उन्होंने देखा कि गोविंद मुस्कुराकर किसी से बात कर रहे हैं।

जब अर्जुन श्रीकृष्ण के थोड़ा और पास गए तो देखा माधव चांद को देखकर उससे बातें कर रहे हैं। दरअसल, चांद में राधा रानी की छवि दिखाई दे रही थी और श्रीकृष्ण अपनी राधा से बात कर रहे थे। अर्जुन चुपचाप वहां खड़े होकर गोविंद का इंतजार कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर ब्रज में राधा रानी यमुना किनारे खड़ी चांद में श्री कृष्ण को देखते हुए उनसे बातें कर रही थी। तभी राधा ने श्रीकृष्ण से पूछा कान्हा, तुमने अर्जुन को इतना श्रेष्ठ गीता का ज्ञान दिया, जिससे वह महाभारत जैसे युद्ध में जीत हासिल कर पाया, लेकिन तुमने उसे वह रहस्य क्यों नहीं बताया?

इतना कहने के बाद राधा रानी की छवि उस चांद से गायब हो गई। अर्जुन यह बातें सुनकर चौंक गए और उनके मन में बेचैनी होने लगी। आखिर माधव ने मुझसे कौन सा रहस्य नहीं बताया और क्यों? बहुत देर वह वहीं खड़े रहे, सोचते रहे। जब उनसे नहीं रहा गया तब वह अपने मित्र के पास गए और उनसे बोले, माफ करना माधव, मैंने आपकी बात सुन ली। लेकिन वह कौन सा राज है जो आपने मुझे नहीं बताया और राधा जी को कैसे पता लगा वो रहस्य? श्री कृष्ण बोले पार्थ, अगर मैं वह रहस्य तुम्हें युद्धभूमि में बता देता तो तुम युद्ध करने के लायक ही नहीं रह जाते।

अर्जुन ने पूछा ऐसा कौन सा रहस्य? गोविंद? तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया वह रहस्य राधा ही है अर्जुन। राधा ही सारे वेदों का सार है। अगर उस समय तुम्हें राधा तत्व का ज्ञान हो जाता है तो तुम्हें समाधि मिल जाती और तुम युद्ध नहीं कर पाते, क्योंकि श्री राधा को जानने के बाद कुछ भी जानना बाकी नहीं है। सिर्फ राधा नाम जपने से ही इंसान सब वेदों का पार पा लेता है और धर्म की स्थापना के लिए वह युद्ध जरूरी था। वैसे आपको बता दें कि यहां पर राधा तत्व का मतलब जिसकी पूजा खुद श्री कृष्ण करें उस तत्व का नाम राधा तत्व है।

इसके अलावा दोस्तों गीता जीवन जीने का सही तरीका भी सिखाती है। यहां तक कि आज के बच्चे भी बहुत कुछ गीता से सीख सकते हैं। श्रीमद् भगवद् गीता के अनुसार स्टूडेंट्स में क्रोध, जल्दी हार मान लेना, तनाव लेना, हमेशा रिजल्ट के बारे में सोचना ये सभी गुण नहीं होने चाहिए। इससे उन्हें सिर्फ अपनी पर्सनल लाइफ में बल्कि करियर में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पहला ज्यादा क्रोध करना ऐसा देखा जा रहा है कि आजकल के छात्रों में क्रोध की भावना बहुत हो रही है, जबकि यह उनके मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य के लिए सही नहीं हैं।

क्रोध दिमाग में भ्रम पैदा करने लगता है। इससे छात्र अपनी सोचने समझने की क्षमता खोने लगते हैं और जब वह कुछ समझ नहीं सकता तो अपने लिए कैसे कोई सही निर्णय ले सकता है। इसीलिए अच्छा यही है कि अपने गुस्से पर काबू रखें और अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करें। दूसरा सही नजरिया ना होना दोस्तों, कई बार होता है कि मेहनत करने के बाद भी स्टूडेंट्स फेल हो जाते हैं या फिर उन्हें किसी सब्जेक्ट में कम नंबर मिलते हैं। इस बात को वह इतने गलत तरीके से अपने मन में बिठा लेते हैं। जिसके बाद उन्हें कुछ समझाना काफी मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में बात आती है नजरिये की कि उन्हें इस बात को फेलियर की तरह न होकर एक चैलेंज की तरह लेना चाहिए और दोबारा से उस चीज के लिए मेहनत करनी चाहिए जो वह अपनी जिंदगी में पाना चाहते हैं। अगर आप अपने जीवन के प्रति अपना नजरिया सही रखेंगे तो आप अपने फेलियर को भी एक सीख की तरह लेंगे और अपनी पुरानी गलतियों का दोबारा न दोहराते हुए सफलता जरूर प्राप्त करेंगे।

kalyug ke panch satya jo bhagvan krishna dwara bataye gaye the

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