क्यों इतना शक्तिशाली होने के बावजूद बलराम ने नहीं लिया महाभारत युद्ध में भाग.

दोस्तों भगवान श्री कृष्णा को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है और उनके बड़े भाई बलराम को शेषनाग का अवतार लेकिन जहां भगवान श्रीकृष्ण को उनकी मनमोहन मुस्कान और नटखट स्वभाव के लिए जाना जाता है वहीं बलराम को शक्ति के प्रति के रूप में जाना जाता है ! बलराम बहुत अधिक शक्तिशाली थे उन्होंने कई युद्ध लड़े थे और उसमें विजय भी हासिल की थी !

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की इतने शक्तिशाली वह बलशाली होने के बावजूद बलराम महाभारत के युद्ध का हिस्सा नहीं बने थे कहा तो ये भी जाता है की बलराम ने श्रीकृष्ण को कई बार समझाया था की उन्हें महाभारत युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी बात नहीं सनी दोस्तों आखिर ऐसे कौन से करण थे जी वजह से बलराम ने महाभारत के युद्ध में हिस्सा नहीं लिया क्या उन्हें किसी प्रकार का कोई भाई था या फिर इसके पीछे की कहानी कुछ और है !

तो चलिए शुरू करते हैं दोस्तों बलराम जिन्हें बलभद्र, दौन इत्यादि नाम से जाना जाता है, वो भगवान श्री कृष्णा के बड़े भाई थे ! बलराम के जन्म से जुड़ी एक कथा भी काफी ज्यादा प्रचलित है जिसके मुताबिक एक बार श्री राम जी के साथ छोटे भाई लक्ष्मण ने उनसे मजाक में कहा था की मैं आपसे छोटा हूं इसलिए आपकी सारी बात मानता हूं , पर भगवान श्री राम ने उन्हें वरदान दिया था की अगले जन्म में लक्ष्मण उनके बड़े भाई बनेंगे !

दोस्तों इसलिए द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का जन्म हुआ तब लक्ष्मण के अवतार बलराम, श्री कृष्णा के बड़े भाई के रूप में सामने आए ! दोस्तों बलराम को गदा युद्ध का सबसे बड़ा योद्धा माना जाता था ! बलराम जब बालक रूप में थे उस समय ही वह अपनी गदा से कंस द्वारा भेजें गए कई असुरों का वध कर चुके थे ! कहा जाता है की बलराम इतने शक्तिशाली थे की उनके बाल को हाथियों के एक सूंड से भी ज्यादा मजबूत माना जाता था बलराम की इस वीरता की वजह से ही पांडू पुत्र भीम और धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन दोनों ने ही बलराम को अपना गुरु बनाया था ! बलराम ने इन दोनों को गदा युद्ध के सभी गुण सिखाए थे !

कहा जाता है जब महाभारत का युद्ध हो रहा था तब यह दोनों योद्धा बलराम के पास अपनी अपनी तरफ से लड़ने का प्रस्ताव लेकर गए थे लेकिन बलराम किसी एक का पक्ष लेकर दूसरे के साथ अन्याय नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने उन दोनों में से किसी के भी तरफ से युद्ध ना करने का फैसला किया ! यहां तक की बलराम ने अपने भाई श्री कृष्णा को भी यह समझने की कोशिश की की उन्हें भी इस तरह युद्ध में नहीं हिस्सा लेना चाहिए क्योंकि युद्ध में शामिल दोनों ही पक्ष उनके है, पर भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम को समझते हुए कहा यह युद्ध सिर्फ कौरवो और पांडवों के बीच नहीं लाडा जा रहा बल्कि यह धर्म पर धर्म की स्थापना के लिए लाडा जा रहा है हालांकि श्री कृष्णा के समझने पर भी बलराम इस युद्ध में भाग लेने को तैयार नहीं हुए !

पर दुर्योधन बलराम के पास जाता है और उनसे यह वचन लेता है की अगर महाभारत की युद्ध में श्रीकृष्ण और आप भाग लेते हैं तो आप लोग शास्त्र नहीं उठाएंगे दोस्तों यही वजह थी की अपने बड़े भाई बलराम के वचन का maan रखना के लिए भगवान श्री कृष्णा ने महाभारत की युद्ध में शास्त्र नहीं उठा और अर्जुन के sarthi बनकर युद्ध में भाग लिया !

बलराम की बात का maan रखते हुए कौरवों और पांडवों दोनों में से किसी के भी साथ अन्याय ना हो इसलिए भगवान श्री कृष्णा ने दोनों side यानी पांडवों और कौरवों के सामने ये shart राखी थी की तुम्हें मुझे यह मेरी नारायणी सी में से किसी एक का चयन करना होगा परंतु मैं पहले ही बता देता हूं की संपूर्ण युद्ध में मैं ना तो युद्ध करूंगा और ना ही कोई शास्त्र धरण करूंगा ! बलराम युद्ध ना करने का प्राण लेते हैं और तीर्थ की यात्रा पर जान का निर्णय लेते हैं !

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