अंतिम संस्कार के बाद मृत आत्मा के साथ क्या होता है ?

मित्रों इस दुनिया में अगर कोई सबसे बड़ा सत्य है तो है हमारी मृत्यु जिसे चाहकर भी इंसान ताल नहीं सकता आपने देखा होगा की हिंदू धर्म में जब भी कोई इस दुनिया को छोड़कर जाता है तो उसके शव का अंतिम संस्कार अर्थात जला दिया जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की परिजनों के अंतिम संस्कार के बाद उस मृत आत्मा के साथ क्या होता है ?

मित्रों गरुड़ पुराण में बताया गया है की मृत्यु के बाद ही हम लोग को 2 यमदूत सिर्फ 24 घंटे के लिए आत्मा को ले जाते हैं इन 24 घंटे में मृतक के परिजनों उसके शरीर का अंतिम संस्कार और अन्य कर्म करते हैं आत्मा को तब तक हम लोग में उसके द्वारा किए गए कर्मों को दिखाया जाता है इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसके घर छोड़ देते हैं उसके बाद 13 दिनों तक आत्मा अपने परिजनों के बीच रहती है !

यानी 13वीं तक आत्मा अपने परिजनों के साथ ही रहती है इसके बाद दिखाए जाते हैं ! अब इनमें से किस मार्ग पर आत्मा को भेजा जाएगा यह उसके जीवन में किए गए कर्मों पर ही निर्धारित होता है ! मित्रों पहला आर्ची मार्ग यानी देवलोक की यात्रा का मार्ग माना जाता है दूसरा मार्ग dhupmarg है जिसे पितृलोक का मार्ग बताया गया है और तीसरा मार्ग उत्पत्ति विनाश मार्ग यानी नर्क की यात्रा के लिए होता है ! अपने पाप और पुण्य को निर्धारित समय तक भोगने के बाद आत्मा को फिर से शरीर मिलता है इतना ही नहीं मृत्यु के बाद जीवात्मा को यमलोक के मार्ग में कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है इन्हीं बाधाओं में से एक है

यमलोक के मार्ग पर पड़ने वाली वैतरणी नदी ऐसा माना जाता है की पुण्य आत्मा तो इस नदी को बड़ी ही आसानी से पार कर लेती है लेकिन पापी आत्मा इस नदी में बुरी तरह प्रताड़ित होती है गरुड़ पुराण में बताया गया है की पक्षीराज गरुड़ श्री हरि से पूछते हैं की ही प्रभु मृत्यु लोक और यमलोक के बीच जो वैतरणी नदी स्थित है उससे जीवात्मा का क्या संबंध है !

और उसे इस नदी से कैसी सजा, जिसके जवाब में भगवान श्री हरि ने कहा की गरुड़, जो भी पापी आत्मा इस नदी में प्रवेश करती है वो रक्त रूपी जल पत्र में रखे घी की तरह खोली जाती है इस नदी का रक्त रूपी जल कीटाणुओं और बाजरा के समान सुरन वाले जीवन से भरा रहता है साथ यह नदी घड़ियाल मगरमच्छ और इनके ही जैसे अनेक हिंसक और मांस भक्ष्णों से भारी हुई है नदी में जैसे ही पापी आत्मा का प्रवेश होता है वो 12 सूर्य की गर्मी के संतुलित tapne लगती है jisse उस तप में पापी चिल्लाते हुए करोड़ विलाप करने लगता है !

जब तक उससे बर्दाश्त नहीं होता तब वह दुरात्मा उस भयंकर रक्त रूपी जल में डुबकी लगाने लगती है मित्रों जिन लोगों ने अपने जीवन में पाप किए होते हैं उन्हें नरक bheja जाता है वहीं जो अच्छे कर्म करते हैं उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है बुरे कर्म करने वालों को नर्क में दंडित किया जाता है वही अच्छे कर्म करने वालों को स्वर्ग में सभी तरह की सुख सुविधाओं के साथ रखा जाता है गरुड़ पुराण में बताया गया है की jin आत्माओं को स्वर्ग में स्थान मिलता है उन्हें यमराज स्वयं अपने भवन से स्वर्ग के द्वार तक छोड़ने जाते हैं

जहां apsarayein उनका स्वागत करती हैं वहीं जो लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं और जीवन भर किसी दूसरे का हित नहीं करते उन्हें नर्क में स्थान मिलता है ! बता दें गरुड़ पुराण में अलग-अलग नरकों का भी जिक्र किया गया है जहां मृत आत्मा को पापों की सजा मिलती है इसके अलावा गरुड़ पुराण में अध्यात्म श्रम नर्क के बारे में कहा जाता है ! यह नरक को उन पति-पत्नियों की आत्माओं के लिए है जो अपने साथी को केवल लाभ या उपयोग की एक वस्तु समझते हैं

इस नर्क में उनकी आत्माओं को मारा जाता है यह सिलसिला बहुत तेज गति से चलता है वही tamishram नर्क में उन लोगों को जगह मिलती है जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों की संपत्ति हड़प होती है यहां उन्हें तब तक मारा जाता है जब तक हो बेहोस जाए! दोबारा होश में आने के बाद फिर से उन्हें इसी तरह लहू लुहान किया जाता है यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक की सजा का समय समाप्त ना हो जाए !

बता दें कुंभ pakakam नर्क में शिकारी लोगों यानी उन लोगों की आत्माओं को लाया जाता है जो अपने शौक के लिए जानवरों की हत्या करते हैं यहां उनके इस कर्म की सजा में उन्हें खोलते तेल में उबाल जाता है, मित्रों वहीं asitabram नर्क में वो लोग आते हैं जो अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ते हैं जिम्मेदारियां से भागते हैं इस नर्क में उन लोगों की आत्माओं को फेंका जाता है यहां लाकर उन्हें तब तक चाकू से छलनी किया जाता है जब तक की वे बेहोश नहीं हो जाते !

गरुड़ पुराण में कला सूत्रम नर्क के बारे में बताया गया है की यहां उन आत्माओं को लाया जाता है जिन्होंने अपने जीवन में कभी बड़ों का आदर सम्मान नहीं किया होता, इस नर्क में बुरे कर्मों की सजा देने के लिए अधिक गर्मी में तब तक रखा जाता है जब तक उनकी सजा की सीमा समाप्त नहीं हो जाती !

तो मित्रों आपने देखा की अंतिम संस्कार के बाद आत्मा के साथ क्या-क्या होता है इसके साथ ही आपने देखा की आत्मा को किस हिसाब से स्वर्ग या नर्क में स्थान मिलता है !

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